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 अरावली


यह धरती और अम्बर

पर्वत पहाड़ नदियाँ समंदर

जाने कब कितने दिनों से 

बिना कुछ लिए, भेदभाव किए

जीवन देते हमको भरपूर

हम क्या नापें                                       

 सागर की गहराई

पर्वत पहाड़ो की ऊँचाई

कौन पर्वतों के शीश को झुका पाया

कौन  सागर की  लहरों को रोक पाया


कितनी ही नदियों को जन्म देती 

आश्रय में कितने ही 

वन्य जीवों को संरक्षण देती

डेटा प्लान #data #mobile #social #netplan

 कलयुग है कलयुग


जमाना कितना खराब आ गया

 कलयुग है सच मे कलयुग,

पहले तो😊 दो तीन दिन थोड़ा चलता था छोटा-मोटा काम भी हो जाता और कई दिनों तक सामने वाला बात भी कर सकता, लेकिन अब 2 दिन हुए नही धमकियां देना शुरु पहले पहल तो 4,6 दिन  प्रेम से  याद दिलाना शुरू हो जाता है 

उसके बाद जैसे ही खत्म हुआ तो 2 दिन तो आपको सुझाव देता रहेगा ये वाला प्लान वो वाला प्लान असुविधा से बचने के लिए और जब सीधे-सीधे हम बात नहीं मानते तो  फिर इनकमिंग बंद की चेतावनी और तो और ओटीपी भी नही बताएगा

अरे🙄


अपने व्यवहार से 😊घर मे कोई आपको हॉट स्पॉट  नाम की सुविधा दे भी देगा, पर वो भी सीमित समय के लिए ।

अरे भाई ये डेटा है ये सबको चाहिए होता है और सब बचा-बचा कर रखते है ताकि दिन खत्म होने तक अपना साथ दे ।

अब क्या करे इस मायाजाल में.फस तो चुके अब तो ये न उगलते बने न छोड़ते 😥

अब तो कुछ भी हो 28,58,84 दिनों का कितने का भी हो 

इसके बगैर काम चल नहीं सकता 

अब 2026 में प्लान मंहगे भी हो जाए  तो कुछ नही कर सकते 

ये डेटा संसार मायाजाल है अब क्या कर सकते है

महीने में कोई प्लान बने न बने किसी भी प्लान पर अमल हो न हो  लेकिन इसका प्लान तो फिक्स है 


बिना डेटा के मोबाइल ऐसे जैसे बिन पैसे के पर्स हो

यूँ तो सुबह उठकर एक बार उसको संभालेंगे नाश्ता पानी भी करवाएंगे लेकिन डेटा नही तो उसकी पूछ परख भी नहीं 

बेचारा पड़ा रहता 

किसी से Wi fi भी लेना हो तो उसको थोड़ा कहना पड़ता है कि भाई देदे थोड़ा मोबाइल देख लूँ

और जैसे ही डेटा ऑन अरे बाप रे जैसे दरवाजे पर कोई आया जो और उसका स्वागत फूल पत्तियों से किया जा रहा ऐसे मेसेज की बारिश होती ।

थोड़ी देर खुशनुमा पल मोबाइल के फिर बस वही 

"बिन डेटा मोबाइल सून"

अब तो प्राण निकल रहे डेटा के बिना

 ओह्ह ये क्या चेतावनी दे रहा कि आपने अगर डेटा प्लान नहीं लिया तो ओटीपी और इनकमिंग कॉल्स नही आएंगे..... 

ये तो गजब कर रहा ।

अब तो अच्छा सा मुहर्त देखकर प्लान लेना ही पड़ेगा।

अब इस व्यथा को पोस्ट करने के लिए भी वाईफाई लिया है तो फटाफट कर देती हूँ ।

कहीं वाईफाई भी छीन न जाए ।


संगीता दरक माहेश्वरी

खुद से मिला कीजिए #खुद से #मन #it self #i and me

मन 

मन सुबह आँख खुलते ही अश्व की गति से ऐसा भागता है पता नही कितनी योजनाएं

बनाता ओर कितने ही जनों को लेकर ख्याल बुनता रहता 

ऐसा लगता मानो रात को हम ने सभी को कहकर  सुलाया हो की सुबह मिलते है और और सुबह  होते ही सब मन के साथ जाग गए 

क्या आपने  कभी सोचा है हमें खुद को समझने के लिए किसी और का सहारा लेना पड़ता है ऐसा क्यों होता है

क्यों हम अपनी खुद की बात नहीं मानते हैं क्यों हमें हमेशा हर कोई तीसरा चाहिए होता है अपने आप

को समझने के लिए कभी हम बुक्स पढ़ते हैं अच्छी तो सोचते हैं इससे हम सुधरेंगे कभी किसी का मोटिवेशनल स्पीच सुनते हैं तो हम सोचते हैं कि इससे सुधरे लेकिन मन भागता रहता है पता ऐसा क्यों होता है क्योंकि हम दूसरों की बात नहीं हम खुद की बात सुनते हैं कभी आप देखिए सुबह उठते ही अगर आपने सोचा कि हां मुझे उठना है मॉर्निंग वॉक पर जाना है  तो अवचेतन मन को अपनी इस बात का संकेत मिल जाता है कि हां मुझे उठना है और यदि हम मन में ठान लेते हैं कि नहीं आज नहीं उठना है  आज मुझे मॉर्निंग वॉक नहीं जाना है तो जो पहली लाइन आपने बोली है हां मुझे आज घूमने नहीं जाना है वह अवचेतन मन ने सुन ली तो बस वही होना है आप उठेंगे नहीं और आलस करके फिर सो जाएंगे तो मेरे हिसाब से सबसे ज्यादा हम अपने आप की सुनते हैं और हम इस भ्रम में रहते हैं कि कोई हमें समझाएं तो हम समझे लेंगे

  हम जब तक अपने आपके साथ नहीं बैठेंगे तब तक हम नहीं सुधरेंगे नहीं सोचेंगे नहीं समझेंगे।


बस मैं भी सुप्रभात के इंतजार में हूँ 

सफर पर तो निकल पड़ी हूँ अँधेरा छटने को है..............

बूढ़े माता पिता

 https://youtube.com/shorts/UpRwcB-9Oqw?si=k9V1nOBIUOVCqvBm

आज का कड़वा सच 

सुनिए और अपनी प्रतिक्रिया जरूर दे

छठ पूजा #छठ पूजा कैसे करे #छठ गीत 2025छठ पूजा

 दिल्ली देश का दिल,

सिंहासन बदले बदला ना 

यमुना का हाल ।


छठ पूजा करने को

 भक्त तो हैं तैयार,

 स्वच्छता की रेखा 

तय कर पाएगी सरकार।


 सूर्य उदित हो

 नव प्रभात हो

 साफ स्वच्छ यमुना का 

आचमन हो


 अस्त हो सूर्य 

पर ना अंधकार हो

श्रध्दा भाव से बस

छट का पूजन हो ।

Rss #Rss #राष्ट्रीय स्वयंसेवक

 राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ


देश हित और अनुशासन

की जो बात करता है


मुश्किल घड़ी में मदद को 

हर पल तत्पर रहता हैं


राष्ट्र साधना के सौ बरस 

की गौरव गाथा हैं यह~


समरसता का भाव 

जो हर मन में जगाता हैं

कलयुग है #कलयुग #येरिश्ते #अपने #पराए #klyug

 

कलयुग है.............

पता नहीं क्यों लोगों को सुकून मिलता हैं

दुसरो को परेशान करने में 

किस बात का घमंड करते हैं

दुसरों के बहकावे में आकर 

अपने रिश्तें खराब करते हैं 

क्या मंथरा का होना हर युग में जरूरी हैं


माना राम को श्री राम बनने के लिए वनवास जाना पड़ा लेकिन राजा

दशरथ को जो पुत्र वियोग सहना पड़ा उसका क्या 

अगर श्रवण कुमार का श्राप था तो उसके लिए मंथरा का

कैकयी के मन में आग लगाना ये बात  उचित है क्या


भाई-भाई के मन में बेर करवाने की कोशिश की गई 

महाभारत में पुत्र मोह में धृतराष्ट्र को कुछ दिखाई नही दिया

गांधारी ने पट्टी बांध ही रखी थी 

और पुत्र अधर्म  पर अधर्म करते गया और पूरे वंश का विनाश हो गया ।


 धैर्य रखना होगा कलयुग है 

 पग-पग पर यहाँ मंथरा बैठी है रिश्तों में जहर घोलने को,

क्योंकि जो दुसरे की आँखों से देखता उसे वैसा ही

दिखाई देगा जैसा उसको दिखाया जाएगा।।

सच बोले कौआ काटे #

 सच बोले कौआ काटे........

आप सोच रहे होंगे कि मैंने कहावत गलत लिख दी कहावत  तो कुछ और है 

पर  वर्तमान में यही कहावत ठीक बैठती है 

सच में, आजकल सच बोलना कितना मुश्किल हो गया हैं

 कोई सामाजिक संगठन हो या कोई ग्रुप हो लोग अपना मतलब साधते है बस  कुछ गलत लगता है या कोई गलत कर रहा है तो पीठ पीछे सब बोलेंगे ओर  सामने सब चुप । 

और कोई एकाध जिसे सच ओर साफ कहने की आदत हो वो उनके साथ सच बोलने के लिए खड़ा होता है तो जब वो खड़ा होता है (तो उसको आगे करने वाले ) तब जब वो सच बोलने के बाद मुड़कर देखता है तो उसके साथ कोई नही होता है ।

 

कभी कभी मुझे विचार आता है कि लोग भगवान के साथ भी चतुराई करते है क्या वो कान्हा जिसने महाभारत में दुर्योधन की चतुराई को भांप लिया वो कलयुग में चतुर लोगो से कैसे अनभिज्ञ रहेंगे 

कभी कभी तो लगता है ईश्वर भी राह देखता है कि मैं देखूँ तो सही ये कितनी चतुराई मेरे साथ करेगा ।

आजकल जो सच बोलता है जो सामने ओर साफ कहता है उसकी कोई अहमियत नही है और जो

हाँ जी हाँ जी करता है  उसने तो जैसे जग जीत लिया हो  

क्या फिर जो सच बोलता हो उसे काले कोओ से डरकर कहि किसी संगठन समुह से जुड़ना नही चाहिए

उसे अपनी सच्चाई और साफ कहने की आदत की सजा मिलनी चाहिए 

मैं सोचती भी हूँ कि चतुराई से नारायण सेना पा तो ले पर विजय तो धर्म के सारथी के साथ ही होगी ।

पर सबको समझाए कौन 

आजकल हर जगह हर कोई चतुराई से ही अपना काम निकाल रहा या अपनी जगह बना रहा है

लोग इतनी जल्दी रंग बदलते है कि गिरगिट भी सोच में पड़ जाता 

यदि आप साफ और सच कहने के आदी है तो अपने कंधे को मजबूत बना लीजिए क्यों कि अनगिनत हाथ आपके कंधे पर बंदूक रखकर चलाने को बैठे है ।


       संगीता अजय दरक माहेश्वरी

       मनासा जिला नीमच


हिंदी दिवस हिंदी के कच्चे हिंदी भाषा

 

हिंदी के कच्चे

आजकल के ये बच्चे, हिन्दी के कच्चे,

आती नहीं हिन्दी की गिनती

छोटी बड़ी ई की मात्रा समझ नहीं आती

भागते अंग्रेजी के पीछे 

हिन्दी इनको नहीं सुहाती

कहाँ लगाना चन्द्रमाँ 

कहाँ लगाना बिन्दी

लिखावट ऐसी कहते 

नहीं लिखना हमें हिंदी

होली दिवाली हो गए 

हैप्पी होली हैप्पी दिवाली

हिन्दी की मिठास अपनापन

 हिन्दी की बात निराली

बचपन में आईज इयर

 नोज खूब सिखाया

मेहमानों के आगे 

अंग्रेजी का जोर जमाया

लेकिन माँ को पता 

ही नहीं चला

पहली बार बच्चा 

कब माँ बोला।।

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 अरावली यह धरती और अम्बर पर्वत पहाड़ नदियाँ समंदर जाने कब कितने दिनों से  बिना कुछ लिए, भेदभाव किए जीवन देते हमको भरपूर हम क्या नापें        ...