कितना कुछ , How much, kitna kuch

 अपने भीतर कितना कुछ,

बिखेर आई हूँ ।

तब कहिं जाकर ,

सारा समेट पाई हूँ !!
             संगीता दरक माहेश्वरी©

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#अरावली #पर्वत #aravali #mountain #nature

 अरावली यह धरती और अम्बर पर्वत पहाड़ नदियाँ समंदर जाने कब कितने दिनों से  बिना कुछ लिए, भेदभाव किए जीवन देते हमको भरपूर हम क्या नापें        ...