आज बड़े दिनों के बाद
आज बड़े दिनों के बाद
समय को चुराकर
भावो को समझाकर
शब्दों को मनाकर
आज बड़े दिनों के बाद
कविता लिखने का मन बनाया
कलम ओर कागज को साथ बैठाया
मन में उमड़ने लगे है कई भाव
लिखूं जिंदगी की धूप -छाँव
या फलसफ़ा ऐ इश्क
नील गगन पर लिखू या धरा के सौंदर्य पर
लिखू उगते सूरज या शीतलता बिखेरते चाँद पर या टिमटिमाते तारो पर
लिखू इस बयार पर या मौसम की ठिठुरन पर
या देह बिखेरती इस धूप पर
या लिख दु अपने मन की बात
या बिखेर दु ढेर सारे जज्बात
या लिखू जो सबके मन को भाये वो बात
आज बड़े दिनों के बाद
संगीता दरक माहेश्वरी
सर्वाधिकार सुरक्षित
बड़े दिनों के बाद आज आपके जज़्बातों ने मचाया धमाल, सच में हाउस कमाल
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