#अरावली #पर्वत #aravali #mountain #nature

 अरावली


यह धरती और अम्बर

पर्वत पहाड़ नदियाँ समंदर

जाने कब कितने दिनों से 

बिना कुछ लिए, भेदभाव किए

जीवन देते हमको भरपूर

हम क्या नापें                                       

 सागर की गहराई

पर्वत पहाड़ो की ऊँचाई

कौन पर्वतों के शीश को झुका पाया

कौन  सागर की  लहरों को रोक पाया


कितनी ही नदियों को जन्म देती 

आश्रय में कितने ही 

वन्य जीवों को संरक्षण देती

डेटा प्लान #data #mobile #social #netplan

 कलयुग है कलयुग


जमाना कितना खराब आ गया

 कलयुग है सच मे कलयुग,

पहले तो😊 दो तीन दिन थोड़ा चलता था छोटा-मोटा काम भी हो जाता और कई दिनों तक सामने वाला बात भी कर सकता, लेकिन अब 2 दिन हुए नही धमकियां देना शुरु पहले पहल तो 4,6 दिन  प्रेम से  याद दिलाना शुरू हो जाता है 

उसके बाद जैसे ही खत्म हुआ तो 2 दिन तो आपको सुझाव देता रहेगा ये वाला प्लान वो वाला प्लान असुविधा से बचने के लिए और जब सीधे-सीधे हम बात नहीं मानते तो  फिर इनकमिंग बंद की चेतावनी और तो और ओटीपी भी नही बताएगा

अरे🙄


अपने व्यवहार से 😊घर मे कोई आपको हॉट स्पॉट  नाम की सुविधा दे भी देगा, पर वो भी सीमित समय के लिए ।

अरे भाई ये डेटा है ये सबको चाहिए होता है और सब बचा-बचा कर रखते है ताकि दिन खत्म होने तक अपना साथ दे ।

अब क्या करे इस मायाजाल में.फस तो चुके अब तो ये न उगलते बने न छोड़ते 😥

अब तो कुछ भी हो 28,58,84 दिनों का कितने का भी हो 

इसके बगैर काम चल नहीं सकता 

अब 2026 में प्लान मंहगे भी हो जाए  तो कुछ नही कर सकते 

ये डेटा संसार मायाजाल है अब क्या कर सकते है

महीने में कोई प्लान बने न बने किसी भी प्लान पर अमल हो न हो  लेकिन इसका प्लान तो फिक्स है 


बिना डेटा के मोबाइल ऐसे जैसे बिन पैसे के पर्स हो

यूँ तो सुबह उठकर एक बार उसको संभालेंगे नाश्ता पानी भी करवाएंगे लेकिन डेटा नही तो उसकी पूछ परख भी नहीं 

बेचारा पड़ा रहता 

किसी से Wi fi भी लेना हो तो उसको थोड़ा कहना पड़ता है कि भाई देदे थोड़ा मोबाइल देख लूँ

और जैसे ही डेटा ऑन अरे बाप रे जैसे दरवाजे पर कोई आया जो और उसका स्वागत फूल पत्तियों से किया जा रहा ऐसे मेसेज की बारिश होती ।

थोड़ी देर खुशनुमा पल मोबाइल के फिर बस वही 

"बिन डेटा मोबाइल सून"

अब तो प्राण निकल रहे डेटा के बिना

 ओह्ह ये क्या चेतावनी दे रहा कि आपने अगर डेटा प्लान नहीं लिया तो ओटीपी और इनकमिंग कॉल्स नही आएंगे..... 

ये तो गजब कर रहा ।

अब तो अच्छा सा मुहर्त देखकर प्लान लेना ही पड़ेगा।

अब इस व्यथा को पोस्ट करने के लिए भी वाईफाई लिया है तो फटाफट कर देती हूँ ।

कहीं वाईफाई भी छीन न जाए ।


संगीता दरक माहेश्वरी

खुद से मिला कीजिए #खुद से #मन #it self #i and me

मन 

मन सुबह आँख खुलते ही अश्व की गति से ऐसा भागता है पता नही कितनी योजनाएं

बनाता ओर कितने ही जनों को लेकर ख्याल बुनता रहता 

ऐसा लगता मानो रात को हम ने सभी को कहकर  सुलाया हो की सुबह मिलते है और और सुबह  होते ही सब मन के साथ जाग गए 

क्या आपने  कभी सोचा है हमें खुद को समझने के लिए किसी और का सहारा लेना पड़ता है ऐसा क्यों होता है

क्यों हम अपनी खुद की बात नहीं मानते हैं क्यों हमें हमेशा हर कोई तीसरा चाहिए होता है अपने आप

को समझने के लिए कभी हम बुक्स पढ़ते हैं अच्छी तो सोचते हैं इससे हम सुधरेंगे कभी किसी का मोटिवेशनल स्पीच सुनते हैं तो हम सोचते हैं कि इससे सुधरे लेकिन मन भागता रहता है पता ऐसा क्यों होता है क्योंकि हम दूसरों की बात नहीं हम खुद की बात सुनते हैं कभी आप देखिए सुबह उठते ही अगर आपने सोचा कि हां मुझे उठना है मॉर्निंग वॉक पर जाना है  तो अवचेतन मन को अपनी इस बात का संकेत मिल जाता है कि हां मुझे उठना है और यदि हम मन में ठान लेते हैं कि नहीं आज नहीं उठना है  आज मुझे मॉर्निंग वॉक नहीं जाना है तो जो पहली लाइन आपने बोली है हां मुझे आज घूमने नहीं जाना है वह अवचेतन मन ने सुन ली तो बस वही होना है आप उठेंगे नहीं और आलस करके फिर सो जाएंगे तो मेरे हिसाब से सबसे ज्यादा हम अपने आप की सुनते हैं और हम इस भ्रम में रहते हैं कि कोई हमें समझाएं तो हम समझे लेंगे

  हम जब तक अपने आपके साथ नहीं बैठेंगे तब तक हम नहीं सुधरेंगे नहीं सोचेंगे नहीं समझेंगे।


बस मैं भी सुप्रभात के इंतजार में हूँ 

सफर पर तो निकल पड़ी हूँ अँधेरा छटने को है..............

बूढ़े माता पिता

 https://youtube.com/shorts/UpRwcB-9Oqw?si=k9V1nOBIUOVCqvBm

आज का कड़वा सच 

सुनिए और अपनी प्रतिक्रिया जरूर दे

छठ पूजा #छठ पूजा कैसे करे #छठ गीत 2025छठ पूजा

 दिल्ली देश का दिल,

सिंहासन बदले बदला ना 

यमुना का हाल ।


छठ पूजा करने को

 भक्त तो हैं तैयार,

 स्वच्छता की रेखा 

तय कर पाएगी सरकार।


 सूर्य उदित हो

 नव प्रभात हो

 साफ स्वच्छ यमुना का 

आचमन हो


 अस्त हो सूर्य 

पर ना अंधकार हो

श्रध्दा भाव से बस

छट का पूजन हो ।

Rss #Rss #राष्ट्रीय स्वयंसेवक

 राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ


देश हित और अनुशासन

की जो बात करता है


मुश्किल घड़ी में मदद को 

हर पल तत्पर रहता हैं


राष्ट्र साधना के सौ बरस 

की गौरव गाथा हैं यह~


समरसता का भाव 

जो हर मन में जगाता हैं

कलयुग है #कलयुग #येरिश्ते #अपने #पराए #klyug

 

कलयुग है.............

पता नहीं क्यों लोगों को सुकून मिलता हैं

दुसरो को परेशान करने में 

किस बात का घमंड करते हैं

दुसरों के बहकावे में आकर 

अपने रिश्तें खराब करते हैं 

क्या मंथरा का होना हर युग में जरूरी हैं


माना राम को श्री राम बनने के लिए वनवास जाना पड़ा लेकिन राजा

दशरथ को जो पुत्र वियोग सहना पड़ा उसका क्या 

अगर श्रवण कुमार का श्राप था तो उसके लिए मंथरा का

कैकयी के मन में आग लगाना ये बात  उचित है क्या


भाई-भाई के मन में बेर करवाने की कोशिश की गई 

महाभारत में पुत्र मोह में धृतराष्ट्र को कुछ दिखाई नही दिया

गांधारी ने पट्टी बांध ही रखी थी 

और पुत्र अधर्म  पर अधर्म करते गया और पूरे वंश का विनाश हो गया ।


 धैर्य रखना होगा कलयुग है 

 पग-पग पर यहाँ मंथरा बैठी है रिश्तों में जहर घोलने को,

क्योंकि जो दुसरे की आँखों से देखता उसे वैसा ही

दिखाई देगा जैसा उसको दिखाया जाएगा।।

सच बोले कौआ काटे #

 सच बोले कौआ काटे........

आप सोच रहे होंगे कि मैंने कहावत गलत लिख दी कहावत  तो कुछ और है 

पर  वर्तमान में यही कहावत ठीक बैठती है 

सच में, आजकल सच बोलना कितना मुश्किल हो गया हैं

 कोई सामाजिक संगठन हो या कोई ग्रुप हो लोग अपना मतलब साधते है बस  कुछ गलत लगता है या कोई गलत कर रहा है तो पीठ पीछे सब बोलेंगे ओर  सामने सब चुप । 

और कोई एकाध जिसे सच ओर साफ कहने की आदत हो वो उनके साथ सच बोलने के लिए खड़ा होता है तो जब वो खड़ा होता है (तो उसको आगे करने वाले ) तब जब वो सच बोलने के बाद मुड़कर देखता है तो उसके साथ कोई नही होता है ।

 

कभी कभी मुझे विचार आता है कि लोग भगवान के साथ भी चतुराई करते है क्या वो कान्हा जिसने महाभारत में दुर्योधन की चतुराई को भांप लिया वो कलयुग में चतुर लोगो से कैसे अनभिज्ञ रहेंगे 

कभी कभी तो लगता है ईश्वर भी राह देखता है कि मैं देखूँ तो सही ये कितनी चतुराई मेरे साथ करेगा ।

आजकल जो सच बोलता है जो सामने ओर साफ कहता है उसकी कोई अहमियत नही है और जो

हाँ जी हाँ जी करता है  उसने तो जैसे जग जीत लिया हो  

क्या फिर जो सच बोलता हो उसे काले कोओ से डरकर कहि किसी संगठन समुह से जुड़ना नही चाहिए

उसे अपनी सच्चाई और साफ कहने की आदत की सजा मिलनी चाहिए 

मैं सोचती भी हूँ कि चतुराई से नारायण सेना पा तो ले पर विजय तो धर्म के सारथी के साथ ही होगी ।

पर सबको समझाए कौन 

आजकल हर जगह हर कोई चतुराई से ही अपना काम निकाल रहा या अपनी जगह बना रहा है

लोग इतनी जल्दी रंग बदलते है कि गिरगिट भी सोच में पड़ जाता 

यदि आप साफ और सच कहने के आदी है तो अपने कंधे को मजबूत बना लीजिए क्यों कि अनगिनत हाथ आपके कंधे पर बंदूक रखकर चलाने को बैठे है ।


       संगीता अजय दरक माहेश्वरी

       मनासा जिला नीमच


हिंदी दिवस हिंदी के कच्चे हिंदी भाषा

 

हिंदी के कच्चे

आजकल के ये बच्चे, हिन्दी के कच्चे,

आती नहीं हिन्दी की गिनती

छोटी बड़ी ई की मात्रा समझ नहीं आती

भागते अंग्रेजी के पीछे 

हिन्दी इनको नहीं सुहाती

कहाँ लगाना चन्द्रमाँ 

कहाँ लगाना बिन्दी

लिखावट ऐसी कहते 

नहीं लिखना हमें हिंदी

होली दिवाली हो गए 

हैप्पी होली हैप्पी दिवाली

हिन्दी की मिठास अपनापन

 हिन्दी की बात निराली

बचपन में आईज इयर

 नोज खूब सिखाया

मेहमानों के आगे 

अंग्रेजी का जोर जमाया

लेकिन माँ को पता 

ही नहीं चला

पहली बार बच्चा 

कब माँ बोला।।

छंद लेखन #chhand #मलयज



मलयज छंद 


मिलजुल कर रह।

दुख हँसकर सह।

सब सच-सच कह।

जल बनकर बह।


मत  रुक  अब चल। 

शुभ  नित नभ-थल।।

मन  सुख  हर  पल।

सुन हिय कल-कल।।

 

    संगीता दरक माहेश्वरी

Bs jra sa #shorts #bs jra sa #shortsfeed #selfi #chat #phone #mobile #friend #

 

बस जरा सा

चकाचौंध बहुत हुई

बस रौनक जरा कम हो गई

सेल्फी में मुस्कान बहुत हुई

आँखें अपनो की जरा नम हो गई

 फोन पर चैट बहुत हुई

अपनो से बातें जरा कम हो गई

दौलत शोहरत बहुत कमाई

सुक़ून शांति जरा कम हो गई 

 फ्रेंड लिस्ट लंबी चौड़ी हो गई

अपनो की फेहरिस्त जरा कम हो गई 

जीने की  ख्वाहिशें बहुत  हुई

बस जरा सी उम्र कम हो गई

  

समाचार समाप्त हुए #update #shorts #hindikavita #samachar #durdarshn #news

 

समाचार समाप्त हुए



पहले दिनभर में समाचार आते थे

अब समाचार दिनभर आते है 

नमस्कार से शुरू होकर 

नमस्कार पर खत्म होते थे

देश दुनिया के बारे में

जानकारी देते थे

न कोई ब्रेक न कोई डिबेट

शालीनता से होती थी बस भेंट

दूर से दर्शन करवाते पर

 हर खबर हम तक पहुँचाते

अब भीड़ लगी है समाचारों की

पर कोई समाचार जान नहीं पड़ता

नंबर वन की होड़ लगी है 

समाचारों की किसको पड़ी है 

अमुक अमुक को बुलाकर 

बहस करवाई जाएगी

फिर किसी के बिगड़े बोल पर 

नई हेडलाइन बन जाएगी

सिलसिला चलता रहेगा 

नई खबर मिलने तक


   संगीता दरक माहेश्वरी

   


बन बैठा हर कोई :हिन्दीकविता:#kavi#kaivita #shorts

 शॉल श्री फल और सम्मान

मिलना हुआ कितना आसान

बन बैठा हर कोई कवि  यहाँ

कविताओं की जैसे लगाई दुकान

        संगीता दरक माहेश्वरी

आओ बैठें बात करे #हिन्दीकविता #silsila #poetry #poetrycorner

                     आओ, बैठें और बात करें, 

सुख-दुख साझा साथ करें,

कुछ अपनी कुछ उनकी सुन लेंगे,

आज हम बात समूची कर लेंगे।


रिश्तों में आई जो दरारें, 

आओ, उनकी भरपाई करें,

उनकी सलाह पर कुछ गौर करें,

सुनकर समझने की कोशिश तो करें।


देखो, सब बातों का हल निकलेगा,

बातों का सिलसिला ये चल निकलेगा,

आओ, बैठें और  बात करें,

आओ, बैठें और बात करें।।
   
       संगीता दरक माहेश्वरी      

जरा मुश्किल है #hindikavita #jra #youtubeshorts

 जरा मुश्किल है.....

अपनो से अपनी तारीफ सुनना 

जरा मुश्किल है,

अपनी सफलता की सीढ़ी में 

अपनों का साथ मिलना 

जरा मुश्किल है,

कोई मौका अपने 

अपनो को भी दे

जरा मुश्किल है,

सफलता काअवसर दे कोई 

ऐसा अपनों का दिल मिलना

जरा मुश्किल है ।।

संगीता दरक माहेश्वरी

#क्यों कब और कैसे #श्राद्ध पक्ष #पितरों को प्रसन्न कैसे करे #क्या करे और क्या न करे @sparshbypoetry

 


  पितृ पक्ष  (श्राद्ध) 
     क्यों कब  और  कैसे 
जैसा कि हम जानते है हमारा देश त्योहारों का देश हैं ,परंपरा और रीति रिवाजो और हरेक क्षेत्र में अलग -अलग त्योहारों का महत्व और तौर तरीके।
हम हरेक त्योहार बड़े उत्साह से मनाते हैं। 
नाग पंचमी से लेकर ऋषि पंचमी जन्माष्टमी,गणेश चतुर्थी और अनंत चौदस त्योहार के बाद बारी आती है, पितरों को तृप्त करने की श्राद्ध  की ।
हमारी भारतीय संस्कृति अनूठी अद्भुत है । हमारी परंपरा हमे बड़ो का आदर और सम्मान करना सिखाती हैं। हम मृत आत्मा की शांति का भी ध्यान रखते हैं
और कहते हैं कि ईश्वर कण-कण  में बसता हैं तभी तो हम पशु पक्षियों का भी ख्याल रखते है ।
जहा हम भोजन बनाते समय सबसे पहली रोटी गाय की और आखिरी रोटी श्वान की बनाते हैं।
और जब हम श्राद्ध करते है तब भी गाय ,श्वान और कागा के हिस्से का भोजन निकालते हैं 
श्राद्ध का अर्थ
पितरों के लिए श्रद्धा से किए गए मुक्ति कर्म को श्राद्ध कहते हैं।
 तथा तृप्त करने की क्रिया और देवताओं, ऋषियों या पितरों को तंडुल या तिल मिश्रित जल अर्पित करने की क्रिया को तर्पण कहते हैं। तर्पण करना ही पिंडदान करना है।
 सनातन मान्यता के अनुसार जो परिजन अपना देह त्यागकर चले गए हैं, उनकी आत्मा की तृप्ति के लिए सच्ची श्रद्धा के साथ जो तर्पण किया जाता है, उसे श्राद्ध कहा जाता है। ऐसी मान्यता है कि मृत्यु के देवता यमराज १६ दिन(श्राद्ध पक्ष )में जीव को मुक्त कर देते हैं, ताकि वे स्वजनों के यहां जाकर तर्पण ग्रहण कर सकें।
पितृ श्राद्ध में अपने घर आते है । हमने भी देखा है जिस दिन अपने घर में किसी का श्राद्ध होता है , उस दिन धूप लगाने से पहले घर के बड़े सदस्य कुछ खाते नहीं है। सबसे पहले अपने पितृ को भोजन धूप  के रूप में (गोबर के उपले को अग्नि में जलाकर उसमे खाद्य सामग्री को रखते है) करवाते हैं फिर ब्राह्मण को भोजन करवाते हैं उसके पश्चात घर के सदस्य भोजन करते है 
इन 16 दिनों में सिलाई और कुछ और कार्य नहीं किए जाते हैं ।ऐसा मानते हैं पितरों को तकलीफ होगी
 पितृ या पितर
जिस किसी के परिजन चाहे वह विवाहित हो या अविवाहित हों, बच्चा हो या बुजुर्ग, स्त्री हो या पुरुष उनकी मृत्यु हो चुकी है उन्हें पितर कहा जाता है। पितृपक्ष में मृत्युलोक से पितर पृथ्वी पर आते हैं , और अपने परिवार के लोगों को आशीर्वाद देते हैं। पितृपक्ष में पितरों की आत्मा की शांति के लिए उनको तर्पण किया जाता है। पितरों के प्रसन्न होने पर घर पर सुख शान्ति आती है।

कब बनता है पितृपक्ष का योग- 
हिंदू धर्म में पितृपक्ष का विशेष महत्व होता है। पितृपक्ष के 16 दिन पितरों को समर्पित होता है। शास्त्रों अनुसार श्राद्ध पक्ष भाद्रपक्ष की पूर्णिमां से आरम्भ होकर आश्विन मास की अमावस्या तक चलता हैं। भाद्रपद पूर्णिमा को उन्हीं का श्राद्ध किया जाता है जिनका निधन वर्ष की किसी भी पूर्णिमा को हुआ हो। शास्त्रों में कहा गया है कि साल के किसी भी पक्ष में, जिस तिथि को परिजन का देहांत हुआ हो उनका श्राद्ध कर्म उसी तिथि को करना चाहिए।
शास्त्रों के अनुसार यदि किसी को अपने पितरों के देहावसान की तिथि मालूम नहीं है तो ऐसी स्थिति में आश्विन अमावस्या को तर्पण किया जा सकता है। इसलिये इस अमावस्या को सर्वपितृ अमावस्या कहा जाता है। इसके अलावा यदि किसी की अकाल मृत्यु हुई हो तो उनका श्राद्ध चतुर्दशी तिथि को किया जाता है। ऐसे ही पिता का श्राद्ध अष्टमी और माता का श्राद्ध नवमी तिथि को करने की मान्यता है।
 श्राद्ध क्यों करते हैं 
श्राद्ध से जुड़ी पौराणिक कथा 
पौराणिक कथा के अनुसार, जब महाभारत युद्ध में महान दाता कर्ण की मृत्यु हुई, तो उसकी आत्मा स्वर्ग चली गई, जहां उसे भोजन के रूप में सोना और रत्न चढ़ाए गए। हालांकि, कर्ण को खाने के लिए वास्तविक भोजन की आवश्यकता थी और स्वर्ग के स्वामी इंद्र से भोजन के रूप में सोने परोसने का कारण पूछा। इंद्र ने कर्ण से कहा कि उसने जीवन भर सोना दान किया था, लेकिन श्राद्ध में अपने पूर्वजों को कभी भोजन नहीं दिया था। कर्ण ने कहा कि चूंकि वह अपने पूर्वजों से अनभिज्ञ था, इसलिए उसने कभी भी उसकी याद में कुछ भी दान नहीं किया। इसके बाद कर्ण को 15 दिनों की अवधि के लिए पृथ्वी पर लौटने की अनुमति दी गई, ताकि वह श्राद्ध कर सके और उनकी स्मृति में भोजन और पानी का दान कर सके। इस काल को अब पितृपक्ष के नाम से जाना जाता है।
इस  तरह इस तरह 16 दिन के श्राद्ध किए जाते हैं और पित्र देव को मनाया जाता है !

  

  संगीता दरक माहेश्वरी 
           

2 जून की रोटी #रोटी #2जून #जुगाड़ #2 वक्त #

 दो जून की रोटी


गोल-गोल रोटी जिसने पूरी दुनिया को अपने पीछे गोल-गोल 

घुमा रखा है। यह रोटी कब बनी यह कहना थोड़ा मुश्किल है

 पर हाँ, जब से भी बनी है तब से हमारी भूख मिटा रही है।

आज दो जून की रोटी की बात करते है,

 अक्सर कहा जाता है कि हमें दो जून की रोटी भी

 नसीब नहीं हो रही।

"दो जून की रोटी" यह पंक्ति साहित्यकारों ने, फिल्मकारों ने

 सभी जगह काम में लिया है।

फिल्मों की बात करे तो उसमें भी रोटी का जिक्र हुआ "रोटी" और "रोटी कपड़ा और मकान" जो उस समय की सुपर हिट फिल्म हुई

इतना ही नही साहित्य जगत में प्रेमचंद जी ने भी रोटी की महिमा का बखान किया

जून शब्द अवध भाषा का है जिसका अर्थ होता है समय। 

तो दो जून अर्थात् दो समय की रोटी यानी दो समय का भोजन।

जानकारों की माने तो कहा जाता है कि जून में भयकंर गर्मी पड़ती है और इस महीने में अक्सर सूखा पड़ता है।

 इसकी वज़ह से चारे-पानी की कमी हो जाती है। जून में ऐसे इलाकों में रह रहे ग़रीबों को दो वक्त की रोटी के लिए कड़ी मेहनत करनी पड़ती है। 

इन्हीं हालात में 'दो जून की रोटी' प्रचलन में आई होगी।


यह रोटी (Roti) शब्द संस्कृत के शब्द ‘रोटीका’ से आया और यह बात को 16वीं शताब्दी में लिखित आयुर्वेद के ग्रन्थों में भी मिलता है।

साथ ही 10 वीं और 18 वी शताब्दी में भी रोटी का ज़िक्र किया गया।

हम आदिम मानव के समय की बात करें तो,

 तब वह अपनी भूख जानवरों के शिकार और फल से 

मिटाते थे फिर आग की खोज और उसके बाद अनाज और उसके

 बाद रोटी बनी होगी जो आज जिसे लोग फुलका, चपाती,

 रोटली एवम् भाखरी वगैरह के नाम से भी पुकारते  हैं। 

यह हम भारतीयों का ख़ास भोजन है। 

आज चाहे जो फास्टफूड मिलता हो पर रोटी के बिना 

सब अधूरा लगता है।  ख़ासतौर से उत्तर भारत में जहाँ गेहूँ की पैदावार ज़्यादा है। कहा भी जाता है कि हमारी पहली ज़रूरत रोटी कपड़ा और मकान होती है ।

इसकी अहमियत का अन्दाज़ा हमारी कहावतों में भी मिल जाता है। जैसे लोग कहते हैं कि फलाने गाँव से हमारा ‘रोटी-बेटी का रिश्ता’ है।


अब रोटी चाहे गोल हो या हो कोई और आकार, पतली हो चाहे मोटी, घी में चुपड़ी हो या सूखी हो, उसके साथ प्याज हो या चटनी, दाल हो या हो ढेर सारी सब्जियाँ। रोटी ने अपनी भूमिका हरेक के साथ निभाई दाल रोटी हो या प्याज  रोटी हो रोटी ने कभी भी अपना कदम पीछे नही हटाया।

महंगे आधुनिक रसोईघर में बनी हो चाहे खुले आसमान के नीचे रोटी भूख तो मिटाती ही मिटाती है। 

रोटी ने अपने रूप भी बदले पराँठे तन्दूरी लच्छा नान और

 भी न जाने क्या-क्या ।


और इस रोटी के लिए इंसान क्या-क्या करता है, किसी को यह आसानी से मिल जाती और किसी को बड़ी मुश्किल से

 यह रोटी आलीशान महलों से लेकर झोपड़ी तक किसी अमीर की थाली से ग़रीब के हाथों में दिखाई देती है।

कहते है कि आदमी इस पापी पेट के खातिर सब कुछ करता है, यह रोटी इंसान से अच्छे-बुरे सभी कर्म करवाती है। 

ईमानदारी की रोटी से मन तृप्त हो जाती है,

 वही बेईमानी की रोटी से मन ही नहीं भरता। 

तो आप सब भी दाल रोटी खाओ और प्रभु के गुण गाओ ।।



          

होलिका दहन #होलिका #दहन #होली #

 

होलिका दहन

आज उठाती है सवाल!

होलिका अपने दहन पर, 


कीजिए थोड़ा

 चिन्तन-मनन दहन पर। 

कितनी बुराइयों को समेट

 हर बार जल जाती,


न जाने फिर क्यों 

इतनी बुराइयाँ रह जाती।


मैं अग्नि देव की उपासक,

भाई की आज्ञा के आगे नतमस्तक।


अग्नि का वरदान था  

जला न सकेगी अग्नि मुझे,


पर जला दिया पाप, अधर्म, अहंकार ने

प्रह्लाद को, मैं जलाने चली नादान

पर बचाने वाले थे उसको भगवान।


सच आज भी तपकर निखरता है, 

और झूठ आज भी टूटकर बिखरता है। 


देती जो मैं सच का साथ,

ईश्वर का रहता मुझ पर हाथ!!!

सब्र का बाँध @sparshbypoetry #poetry #hindikavita #poetrylover #new #ttreanding


     सब्र का बाँध


 सुना है सब्र का होता है बाँध,

फिर सहनशीलता की,

 गहरी नदियों में,

जब उफान आएगा।

 और यह उफान जब बाँध की

 दीवारों से टकराएगा,

तो निश्चित ही एक दिन 

बाँध टूट जाएगा,

 और बह जाएँगे

ढह जाएँगे कई अनगिनत रिश्तें।

 जो अंहकार में जीते,

और बिन सोचे समझे 

हमारे सब्र का इम्तिहान लेते हैं।।।

        

           संगीता दरक माहेश्वरी©

हाइकु #राजनीति #दल #पार्टी #कमल #हाथ का पंजा

 हाइकु.......

नेताओं संग

राजनीति के रंग

बदले पल में


नाथ के साथ

क्या खिलेगा कमल

बनेगी बात


देंगे क्या साथ

कमल के बनेंगे 

हाथ मलेंगे


दल-बदल

इनकी चाल देखो

जिधर माल


 गठबंधन

अपना कोई नहीं

स्वार्थ के सारे 


हाथों में हाथ

 है बगल में छुरी

 घात  लगाए।।


   संगीता दरक माहेश्वरी


#अरावली #पर्वत #aravali #mountain #nature

 अरावली यह धरती और अम्बर पर्वत पहाड़ नदियाँ समंदर जाने कब कितने दिनों से  बिना कुछ लिए, भेदभाव किए जीवन देते हमको भरपूर हम क्या नापें        ...